मेरे मन की बात दोस्तों के साथ

एक सच्ची कहानी
दोस्तों सच्ची ख़ुशी और अपने आप पर गर्व हुआ उस दिन एक छोटा सा काम करके

           एक दिन जब मैं और मेरे दो दोस्त दोपहर के समय जा रहा थे एक बाइक पर तीन लोग सवार थे गर्मी का दिन था हम लोगो ने स्कार्फ़ लगाया हुआ था तभी हमने देखा की एक अकेली बूढ़ी औरत पैदल चलते जा रही थी उसके चप्पल पूरी तरह  घिस चुके थे उसके दूर से ही हमें हाथ दिखाया और गाड़ी रोकने का इशारा किया।
हमने गाड़ी रोकी वो औरत इससे पहले हम कुछ पूछते बोलने लगी बीटा मुझे स्टेशन तक छोड़ दो मेरी गाड़ी छूट गयी है और मेरे पास पैसे भी नहीं है

हमने सोचा की हम लोगो के पास सिर्फ एक ही गाड़ी है और चार आदमी एक साथ नहीं  सकते

उस औरत  हालत देख के हमें हमें थोड़ा दुःख लगा
तब मैंने और मेरे दोस्तों ने सोचा की दो दोस्त वही रुक जाते है और एक दोस्त उस औरत को छोड़ के वापस आएगा फिर तीनो एक साथ फिर से चले जायेंगे

तभी उस बूढी औरत ने पूछा बेटा तुम लोगो के पास पानी है क्या ?
मुझे बहुत जोर से  लगी है, मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया है

मगर हमारे  न तो पानी था न ही कुछ खाने को 
उसके बाद और दोनों दोस्त रुक गए और मैं उसे गाड़ी में बिठा कर जाने लगा
उस बूढी औरत ने कहा की तुम बहुत लोग नेक दिल बच्चे हो भगवान सदा तुम्हारी सहायता करे
 मैंने पूछा ?
आप कोन हो और इस गर्मी में कैसे सफर कर रही हो ?
आपके परिवार में कोई नहीं है क्या?
उनकी आँख से आशु आ गए जब मैंने ये बात उनसे पूछी
मैंने उन्हें शांत कराया
फिर वो बोलने लगी मेरे तीन बेटे है सब की शादी हो चुकी है और वो अपने परिवार के साथ रहते है,
मैंने तुरंत पूछा पर आप कहा रहती हो ?
उन्होंने बताया  उनके बेटे इस बात की वजह  लडते है मेरे  खाना कौन देगा  उनके पास मेरे लिए खाना भी नहीं है फिर भी में मज़बूरी में उनके पास रहती हु ४ महीने एक बेटे के पास और ४ महीने दूसरे के पास इसी तरह मेरी जिंदगी  रही है।
मुझे बहुत दुःख लगा क्युकी वो सच में बहुत भूखी थी
इतना बात करते तक हम लोग स्टेशन के पास पहुंच गए थे
मैंने एक होटल में ले जाकर बैठाया और एक प्लेट नास्ता आर्डर किया और उन्हें दिया और साथ में एक गिलास पानी भी दिया
 अब मैंने  अपने जेब से कुछ चिल्लहर पैसे निकाले  वो शायद 80 रु थे
मैंने उन्हें दिया और कहा की आप होटल वाले को पैसे मत देना में दे दिया हु
आप इस पैसे अपने पास रखिये।

और गाड़ी का किराया दे दीजिएगा  इस पैसे से

और मैं वहां से वापस आ गया और दोस्तों को लेकर फिर से गया
दोस्तों को उसके बारे में सब कहानी बताई

दोस्तों ने भी मेरा धन्यवाद किया उसे खाना खिलाने के लिए

और हम अपने रस्ते चल दिए
मगर उस दिन हमें बहुत  बड़ी सिख मिली।

धन्यवाद
 

  

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