क्या करें? एक कहानी

ये  एक सच्ची  कहानी है
दोस्तों
एक दिन की बात है  बुजुर्ग आदमी अपने बीमार रिस्तेदार को देखने जाता है जो की रिस्ते में उसका भाई लगता था
वो आदमी ६ महीने से बीमार था उन दोनों भाइयों में बहुत प्यार था जब  बुजुर्ग अपने के पास पंहुचा तो  भावुक गया और आप को सम्हालते हुए बैठा उसके बाद उसने चाय पी फिर अपने भाई का हालचाल पूछा
दोनों थोड़ी देर बात करते रहे
उन्होंने अपने पुराने दिनों के ,बारे में कुछ  बातें की कुछ कुछ देर बात करने के बाद  बजुर्ग ने रामायण के कुछ दोहे दोहराए और रुंआसा होकर बोले इस संसार में सब तरफ दुःख ही दुःख है सारे इंसान अपने मतलब पूरा होने पर ही सुख का अनुभव करते है, किसी भी व्यक्ति को असल में सुख नहीं है सारे सुख क्षणिक मात्र है,
हमने जिन बच्चों को बड़ा किया उंगली पकड़ कर चलना सिखाया जब वे चलने लायक हुए तब हमारा हाथ छोड़ दिया तब भी हम खुश थे की हमारा बेटा  चलना सिख गया करके परन्तु जब आज हमें अपने बच्चों के हाथ की जरुरत पड़ रही है तो वे हमारा हाथ छोड़ कर कही और हमसे दूर चले गए है
  आज के समय  के लिए ही उनसे उम्मीद लगा रखी थी.  . . . .. . . . . . . इतना कहते ही उनके आँख से आशु आ गए तब बीमार भाई ने उनको हिम्मत दी और कहा आज के इस कलयुग में सबसे ज्यादा दुःख किसी से उम्मीद लगाने से ही होता है. और हमने जो भी किया वो हमरा फर्ज था अगर हम अपने बच्चों के लिए कुछ नहीं किया होता तो आज हम उन्हें अपना बच्चा भी नहीं बोल पाते। ………. हमने अपना धर्म निभाया है

 असल में वो बुजुर्ग अपने एकलौते बेटे के कारण दुखी था क्यूकि उसके बेटे ने अपनी महिला मित्र (girlfriend) के लिए अपना घर छोड़ दिया था उसके बाद उस बुजुर्ग  तबियत ख़राब होने थी. इस कारण वह वह और ज्यादा परेशान रहता था.
उन्होंने बहुत सारी आध्यात्मिक बातें की परन्तु सब बातों सार एक ही था की
जिंदगी जीने का का असली मजा लेना है तो या तो संत बन जाओ और लालची दुनिया से परे हो जाओ और दूसरा किसी से कभी भी किसी भी   प्रकार की उम्मीद मत रखो

और अपने जीवन में वो काम करो की किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े

तो प्लीज दोस्तों अपने माँ और पापा की इज्जत करे सहायता करें उनका साथ कभी ना छोड़े
असल में वही लोग आपका पहला प्यार है न की महिला मित्र (girlfriend)

अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी तो कृपया इसे शेयर करे और अपने दोस्तों को सुनाए
और अपने भाई के वेबसाइट    www.chhotubhai.com    पर आते रहें। 

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